- मिलन सिन्हा
और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं।
राजनीति में नेता बनना और अरसे तक बने रहना साधारण बात तो कतई नहीं है। इसके लिए आपको असाधारण एवं असामान्य प्रतिभाओं से लैस होना पड़ेगा, उसमें नयापन लाते रहना पड़ेगा और साथ ही उसे धारदार बनाये रखना पड़ेगा, बात -बेबात, समय -असमय आरोप -प्रत्यारोप के खेल में आप को पारंगत होना पड़ेगा । अन्यथा कम -से -कम बिहार के राजनीतिक मंच के दिग्गज खिलाड़ी तो आप नहीं बन सकते और न ही माने जाएंगे। प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक सन्दर्भ में किसी भी मुद्दे पर मीडिया में सत्ता पक्ष व विपक्ष के नेताओं के बीच ज्यादातर अनावश्यक आरोप -प्रत्यारोप से भरे बयानों को देखने -पढ़ने से यह बात स्पष्ट हो जाती है। यह बिहार जैसे पिछड़े प्रदेश के लिए अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। बहुत पीछे जाने की जरुरत नहीं होगी। पिछले कुछेक हफ़्तों का यहां का कोई अखबार उठा कर देख लीजिये। इतना ही नहीं, विरोधियों पर आरोप -प्रत्यारोप के क्रम में जो शब्द इस्तेमाल किये जा रहे हैं, वे संसदीय मर्यादा एवं सामान्य शिष्टाचार के विपरीत हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री मांझी के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश पर निशाना साधने की कोशिश होती है, तो दूसरी ओर सुशील मोदी के बहाने नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा जाता है ।
फिर बाल दिवस आ गया और चाचा नेहरु का जन्म दिवस भी । फिर अनेक सरकारी- गैर सरकारी आयोजन होंगे । स्कूलों में पिछले वर्षों की भांति कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा, ढेरों बातें होंगी, बच्चों की भलाई के लिए ढेर सारे वादे किये जायेंगे, तालियां बजेंगी, मीडिया में तमाम ख़बरें होंगी । इस साल ये सब कुछ थोड़ा ज्यादा और जुदा भी होगा क्यों कि बच्चों की बेहतरी के लिए समर्पित दो शख्सियतों, सत्यार्थी व मलाला को नोबल शांति पुरस्कार जो मिला है । हां, आजाद भारत के पहले प्रधान मंत्री और बच्चों के चाचा नेहरू के जन्म दिन के उपलक्ष्य में भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे । बस और क्या ? 