Sunday, September 7, 2014

गुड लाइफ : सफलता-असफलता

                                                                                         - मिलन सिन्हा 

सर्वविदित है कि सफलता -असफलता हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति  होगा जिसे जीवन में केवल सफलता या फिर केवल  असफलता  मिली हो। इसके अलावे  सफलता -असफलता, छोटी अथवा बड़ी कुछ भी हो सकती है और उसका हमारे जीवन पर असर भी अलग -अलग व्यक्ति के लिये अलग-अलग हो सकता  है। लेकिन, एक बात जो सभी व्यक्तियों में अमूमन समान रूप से देखी जा सकती है, वह है सफलता मिलने पर खुश होना और असफलता मिलने पर मायूस होना। हम यह भी जानते हैं कि कामयाबी  या नाकामयाबी से उत्पन्न भावनात्मक  आवेग की तीव्रता कभी -कभी बड़े जोखिम, यथा ब्रेन स्ट्रोक, दिल का दौरा, अवसाद आदि का सबब भी बन जाते हैं । 

बहरहाल, थोड़ा गहराई से सोचने पर आप भी मानेंगे कि सफलता या असफलता एक सापेक्ष स्थिति है जो उस प्रयोजन के निमित्त हमारे द्वारा किये गए परिश्रम के अलावे अन्य कई बातों पर निर्भर करती है। अगर यह  सच  है तो फिर कामयाबी  हमारे सिर चढ़ कर क्यों बोलती है या नाकामयाबी से हमारा दिल क्यों टूट जाता है ? ऐसा इसलिए कि हम सक्सेस को दिमाग में रख लेते हैं और फेलियर को दिल में।   दरअसल, सफलता कोई सिर पर चढ़ा  कर रखने वाली चीज नहीं है और न ही असफलता कोई दिल में बैठा कर रखने वाली चीज। इसके विपरीत हर छोटी -बड़ी सफलता को दिल से लेना चाहिए  एवं हर असफलता को दिमाग से। असफलता के कारणों का सही विश्लेषण तभी हो पाता है और आगे के लिये बेहतर योजना तथा रणनीति भी तभी बन पाती है। उसी तरह सफलता को दिल से लेने पर हम आनन्दित महसूस करते हैं। आनन्द के उन क्षणों को हम सकारात्मक तरीके से दूसरों के साथ साझा भी हम तभी कर सकते हैं। गुणीजन इन अहम बातों को अच्छी तरह जानते -समझते हैं और तदनुसार सफलता-असफलता दोनों ही स्थितियों में सन्तुलित एवं तनावरहित जीवन जीते हैं। सच कहें तो गुड लाइफ का सार इसी में छिपा है। 

   और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं ।

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