Sunday, August 24, 2014

गुड लाइफ : स्वच्छता का सवाल

                                                 - मिलन सिन्हा 
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने  अन्य अनेक विषयों के साथ स्वच्छता पर दो टूक बात कही और हर देशवासी से पूछा कि क्या हम खुद साफ़ सुथरा नहीं रह सकते, अपने आसपास तथा गली-मोहल्ले की सफाई सुनिश्चित नहीं कर सकते ? ऐसी ही बातें उन्होंने सांसद बनने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र काशी पहुंचने पर वहां की जनता से पूछी थी । बात छोटी है, पर है बहुत ही महत्वपूर्ण एवं बहुआयामी । पटना या ऐसे ही किसी शहर के बाशिंदे गंदगी के दुष्प्रभाव से रूबरू होते रहते हैं, जहां दो तीन दिनों की बारिश के बाद शहर के अधिकांश इलाके पानी से भर जाते हैं व गंदे पानी की निकासी हफ़्तों तक नहीं हो पाती है, क्यों कि नाले पोलिथिन-थर्मोकोल या अन्य कचड़ों के कारण जाम हो जाते हैं; नाले या तो बने नहीं या ठीक से नहीं बने; नालों की नियमित सफाई नहीं होती; नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ विधायक-सांसद तक  क्षेत्र की बुनियादी मसलों के प्रति कम संवेदनशील रहते हैं आदि आदि । ये सभी सवाल गैरवाजिब नहीं हैं, लेकिन बड़ा सवाल हमारी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भी है । सड़कों पर कूड़ा -कचड़ा रोज कौन फेंकता है, सार्वजानिक स्थानों को कौन गन्दा करता है, नालों में पोलिथिन-थर्मोकोल आदि कैसे पहुंचता है, नगर निगम के मेयर व पार्षद को कौन चुनता है, आपदा प्रबंधन से जुड़ा हमारा प्रशासनिक तंत्र कब और किसके लिए काम करता है ? जाहिरा तौर पर हमें  इन प्रश्नों का जवाब  न केवल देना होगा, बल्कि स्वच्छता के मामले में कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निजी तथा सामूहिक स्तर पर पहल करनी पड़ेगी । और इसकी शुरुआत हमसे होगी, हमारे घर से होगी, क्योंकि स्वच्छता में 'स्व' की भूमिका हमेशा से अहम रही है । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 'मनसा-वाचा-कर्मणा '  इसे साबित करते थे । 

                  और भी बातें करेंगे, चलते-चलतेअसीम शुभकामनाएं ।

1 comment:

  1. This world is like a garden. A single person cannot beautify the whole garden. He has to choose a corner of it and beautify it. If everyone contributes his little bit, the whole garden will be beautiful. Self awareness is very essential. Well written article.

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