Sunday, June 1, 2014

गुड लाइफ : रिजल्ट को स्वीकारें

                                                                                           - मिलन सिन्हा

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दसवीं और बारहवीं के परीक्षा फल की चर्चा सब ओर जारी है । कहीं ख़ुशी, कहीं गम का माहौल है । लेकिन सोचनेवाली बात है कि जो रिजल्ट घोषित हो चुका, उसे क्या अब पलटा जा सकता है ? नहीं न ! तो फिर, परीक्षा का जैसा भी रिजल्ट रहा हो,  उसे हमेशा स्पोर्टिंगली लें । सक्सेस या फेलियर ( सफलता या असफलता ) तो एक सापेक्ष स्थिति है । रिजल्ट खराब अथवा आशा के अनुरूप नहीं होने के एक नहीं, अनेक कारण हो सकते हैं । मसलन, पढ़ा बहुत, पर सवाल कठिन थे; सवाल तो सही थे, पर सटीक उत्तर नहीं  लिख पाये; तैयारी पूरी नहीं कर पाये; तैयारी तो पूरी थी, पर एग्जाम से ठीक पहले तबियत खराब हो गयी आदि,आदि । सो, खुद को कोसना शुरू मत कर दें और न ही इस समय बड़ों के डांट- फटकार या किसी दूसरे के आलोचना को दिल से लें ।  खराब रिजल्ट के कारण मायूस/तनावग्रस्त/ अवसादग्रस्त हो जाना गैर मुनासिब नहीं है तथापि ऐसी अवस्था हो तो बच्चों का अपने अच्छे दोस्तों से बातचीत करना, टीवी आदि पर कॉमेडी शो का आनन्द लेना,पर्याप्त पानी/ मौसमी फल का रस पीना और नींद का पूरा लाभ लेना बेहतर है । हाँ, थोड़ा ठहर कर ही अनपेक्षित रिजल्ट का निरपेक्ष भाव से अच्छी तरह विश्लेषण करना उचित है । फिर पीछे जो गलतियां हुई थीं, उन्हें आगे न दोहराने का संकल्प लेते हुए आगे सुधार हेतु प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसपर अमल प्रारम्भ कर देना चाहिए । 
   
कहना न होगा, ऐसे वक्त में अभिभावकों का बच्चों के साथ मजबूती से खड़ा रहना  और घर के वातावरण को तनाव से मुक्त रखने की पूरी कोशिश करना अपेक्षित है । आखिरकार, जिंदगी में परीक्षाएं तो आती रहेंगी और सफलता -असफलता का सिलसिला भी कमोबेश चलता रहेगा, पर कोई भी रिजल्ट जीवन से बड़ा तो नहीं हो सकता, क्यों?

                 और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

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