Tuesday, June 10, 2014

नेताओं के काफिले छोटे हों

                                                                                            - मिलन सिन्हा

Displaying 10037463-0.jpg
क्या नेताओं को जनता के पैसे से असीमित तेल खर्च करने की  आजादी  है ? हाल ही में एक न्यूज़ चैनल में दिखाया जा रहा था कि किस – किस राज्य के मुख्यमंत्री के काफिले के साथ कितनी गाड़ियां तेल गटकते हुए दौड़ती है। किसी के साथ सत्रह, तो किसी के साथ बारह।  सबसे कम छह गाड़ियों के साथ चलने वाले दो तीन मुख्यमंत्री हैं, बेशक त्रिपुरा के मुख्यमंत्री को छोड़ कर, जो सादगी का एक उदहारण हैं। सवाल उठता है कि अगर कुछ मुख्यमंत्री छह गाड़ियों के साथ चल सकते हैं तो दूसरे क्यों नहीं ? ऐसे मुख्यमंत्रियों में कई अपने को लोहियावादी, गरीबों-शोषितों के मसीहा  कहते नहीं थकते हैं।
  
एक मोटे अनुमान के मुताबिक केवल केंद्र सरकार के मंत्रियों, अधिकारिओं आदि के वाहनों पर आनेवाला सालाना खर्च तीन हजार करोड़ रूपया से भी अधिक है।अगर देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों  में इस मद में होनेवाले व्यय को शामिल कर लिया जाय तो यह राशि सालाना पचास हजार करोड़ से कम नहीं होगी।  

ऐसे में यह नितांत आवश्यक है कि तुरंत प्रभाव से सरकारी अमले द्वारा तेल के खपत को अत्यधिक कम किया जाय जिसकी शुरुआत केंद्र एवं राज्यों के मंत्रियों और अधिकारिओं द्वारा निजी कार्यों के लिए सरकारी वाहन का उपयोग बंद करने से हो। इससे एक सार्थक सन्देश  आम लोगों तक जाएगा। देश के प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्य मंत्रियों को अपने अपने काफिले में कम से कम गाड़ियों को शामिल करने का निर्णय स्वयं लेना चाहिए जिससे  खर्च  में कटौती तो हो ही, साथ ही  इस कठिन दौर में वे खुद जनता के वास्तविक प्रतिनिधि के रूप में खड़ा पा सकें । 

                 और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

No comments:

Post a Comment