Tuesday, January 18, 2022

शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम जरुरी

                                        - मिलन  सिन्हा,  स्ट्रेस मैनेजमेंट एंड वेलनेस कंसलटेंट 

आम तौर पर व्यायाम और खेलकूद को फिजिकल फिटनेस के साथ जोड़ कर देखा जाता है;  मसल्स और हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में अहम माना जाता है. लेकिन कोविड 19 महामारी के इस लम्बे और बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में अपने मेंटल  हेल्थ को सही रखना ज्यादा मुश्किल हो गया है. आशंका-कुशंका, चिंता, तनाव और अवसाद से ग्रस्त लोगों की संख्या में इस बीच एक बड़ा उछाल देखा जा रहा है. इसके कई कारण हैं. समाधान की बात करें तो  शारीरिक  के साथ-साथ  मानसिक हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने का एक बड़ा प्रभावी उपाय है नियमित व्यायाम करना. आइए जानते है.

जब हम व्यायाम करते हैं  तब हमारे शरीर में सेरोटोनिन, एंडोर्फिन और डोपामाइन नामक फील गुड और फील हैप्पी केमिकल का स्राव होता है. परिणाम स्वरुप हम अच्छा, आनंदित और उत्साहित महसूस करते हैं. यह ब्रेन हेल्थ के लिए एक बेहतर पोषण है.

नियमित व्यायाम से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे तरीके से होता है. इससे ब्लड प्रेशर यानी बीपी को नियंत्रण में रखना आसान होता है. इतना ही नहीं एकाधिक मेडिकल सर्वे बताते हैं कि व्यायाम करने वाले लोगों में हाई बीपी का जोखिम 75 फीसदी तक कम हो जाता है. दरअसल एक्सरसाइज करने से हमारे शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है और एलडीएल यानी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और नतीजतन हमारा हार्ट हेल्दी रहता है. इसके कई अन्य हेल्थ बेनिफिट हैं.

यह पाया गया है कि चिंता, तनाव और अवसाद से ग्रस्त लोगों में कोर्टिसोल नामक केमिकल का स्तर ज्यादा होता है. नियमित व्यायाम करने से कोर्टिसोल का लेवल काफी कम हो जाता है. आपका मूड फ्रेश हो जाता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रेगुलर एक्सरसाइज दिमाग के लिए एंटीडिप्रेशन की दवा की तरह काम करता है. 

व्यायाम करने से हमारे शरीर के सारे अंग सक्रिय होते हैं. हम अधिक मात्रा में ऑक्सीजन ग्रहण कर पाते हैं. इससे न केवल ब्रेन सेल्स काफी एक्टिव रहते हैं, बल्कि नए ब्रेन सेल्स का निर्माण भी होता है.  हमारा एनर्जी लेवल भी उन्नत होता है. दिनभर काम करने में मन लगा रहता है. पाया गया है कि ऐसे लोगों को रात में अच्छी नींद आती है. इससे उनका मेटाबोलिज्म और इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग  बना रहता है. 

मोटापा के दुष्परिणामों से हम अपरिचित नहीं हैं. इसका असर हमारे मेंटल हेल्थ पर लाजिमी है. नियमित एक्सरसाइज के परिणाम स्वरुप कैलरी  तेजी से बर्न होता है और वजन नियंत्रण में रहता है. हमारी मेमोरी में भी गुणात्मक सुधार होता है. इसके पीछे अच्छी नींद और बेहतर मूड का योगदान भी अहम है जो व्यायाम से सम्बद्ध है. 

चूँकि नियमित व्यायाम से हमें एक स्वस्थ और अनुशासित जीवन जीने की आदत हो जाती है. नतीजतन हमारा शरीर और ब्रेन दोनों ज्यादा स्ट्रांग और सक्रिय रहता है. इससे हम अपना हर काम उत्साह से करते हैं और स्वाभाविक रूप से बेहतर प्रोडक्टिविटी भी दर्ज कर पाते हैं. 
  
अंत में दो और अहम बातें. सुबह का समय व्यायाम के लिए सबसे उपयुक्त होता है. तेज गति से व्यायाम करने से पहले अपने शरीर के सारे अंगों को वार्मअप एक्सरसाइज से लचीला और सक्रिय कर लेना बहुत जरुरी है.   

(hellomilansinha@gmail.com)

                  
             और भी बातें करेंगे, चलते-चलते. असीम शुभकामनाएं.              # "प्रभात खबर हेल्दी लाइफ " में 22.12.21 को प्रकाशित   

#For Motivational Articles in English, pl.visit my site : www.milanksinha.com

Tuesday, January 4, 2022

पूरे करें संकल्प

                                          - मिलन  सिन्हा,  मोटिवेशनल स्पीकर एंड वेलनेस  कंसलटेंट

कोविड 19 वैश्विक महामारी के बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में वर्ष 2021 विदा हो गया और अब करोड़ों लोग एक नई उम्मीद और उत्साह के साथ नए वर्ष 2022 का स्वागत कर रहे हैं. आज जब कि तमाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के बावजूद हमारा देश आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विकास की नई मिसाल  कायम कर रहा है और आजादी के 75 वें साल को अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है, तब  सभी लोगों, खासकर युवाओं के लिए यह जरुरी हो जाता है कि वे देश को प्रगति की राह पर और तेज गति से आगे ले जाने हेतु निम्नलिखित पांच संकल्पों में से कम-से-कम एक संकल्प लें और उसे पूरा करने का भरपूर  प्रयास करें.

पॉजिटिव सोचेंगे, पॉजिटिव करेंगे: सभी ज्ञानीजन एक मत से यह कहते हैं कि सोच के साथ-साथ कर्म के स्तर पर भी सकारात्मक रहने वाले लोग व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से अध्ययन-अध्यापन, नौकरी-व्यवसाय, खेलकूद, साहित्य-संगीत हर क्षेत्र में असाधारण परिणाम अर्जित करते हैं. ऐसे लोग अच्छी-बुरी हर परिस्थिति में कठिन-से-कठिन समस्याओं का समाधान प्राप्त करने में सफल होते हैं. वे सफलता-असफलता हर हालत में अपना मानसिक संतुलन बनाए रखते हैं. दिशाहीन और भ्रमित नहीं होते. यथासंभव कोशिश करते रहने के वे प्रबल हिमायती होते हैं  और संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा को एन्जॉय करते रहते हैं. उनके इस विचार और व्यवहार से जाने-अनजाने अनेक लोग प्रभावित, प्रेरित और लाभान्वित होते रहते हैं. विश्व विख्यात एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब इसकी एक बड़ी मिसाल हैं. 
  
स्वस्थ रहेंगे, स्वस्थ रखेंगे: शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है. हम जीवन में जो कुछ हासिल करना चाहते हैं, वह खुद को स्वस्थ रखे बगैर बहुत ही मुश्किल होता है, कई बार तो बिल्कुल असंभव भी. अस्वस्थ या बीमार रहने पर हमारी कार्य क्षमता घटती  है, इलाज में रूपये खर्च होते हैं और परिजन अनावश्यक रूप से स्ट्रेस में रहते हैं. इतना ही नहीं, खुद स्वस्थ रह कर ही हम अपने परिवार-समाज के बुजुर्गों-बीमारों की सेवा कर सकते  हैं.  इसके लिए अपनी दैनिक दिनचर्या में ज्यादा-से-ज्यादा अच्छे इनपुट्स को शामिल करना बहुत जरुरी है. हां, अपने आसपास के लोगों को स्वस्थ रखने  हेतु उन्हें जागरूक और प्रेरित करना भी उतना ही जरुरी है. सामाजिक  प्राणी होने के नाते यह हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्व है. ऐसे भी अगर हमारे आसपास के लोग अस्वस्थ होंगें, तो क्या हम ज्यादा दिनों तक स्वस्थ रह पायेंगे. कोरोना महामारी के लम्बे संकटकाल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी असाधारण व्यस्तताओं के बावजूद जिस तरह खुद को फिट और हेल्दी रखने के साथ-साथ 135 करोड़ देशवासियों को स्वस्थ रखने का अथक प्रयास किया है, वह एक अभूतपूर्व उदाहरण है. 

हमेशा युवा बने रहेंगे: हर व्यक्ति हमेशा युवा बना रहना चाहता है, लेकिन क्या सिर्फ देखने में युवा होना युवा होने का प्रमाण होता है ? दरअसल सही मायने में युवा कहलाने के लिए उम्र के इतर हर व्यक्ति में कुछ विशेष गुणों का होना भी जरुरी होता है. स्वामी विवेकानंद के शब्दों में कहें तो युवा वह है जो अनीति से लड़ता है; जो दुर्गुणों से दूर रहता है; जो काल की चाल को बदल देता है; जिसमें जोश के साथ होश भी है; जिसमें राष्ट्र के लिए बलिदान की आस्था है; जो सतत अच्छी बातें सीखता रहता है; जो समस्याओं का समाधान निकालता है; जो प्रेरक इतिहास रचता है; जो बातों का बादशाह नहीं, बल्कि करके दिखता है.  नए साल में हम स्वामी जी के मानदंड पर समय-समय पर अपना मूल्यांकन करते रहें और उतरोत्तर सुधार की ओर बढ़ते रहें तो न उत्साह, ऊर्जा और उमंग की कमी रहेगी और न ही सफलता, संतुष्टि, समृद्धि और सम्मान की. 
 
रिश्ते बनाएंगे और निभाएंगे: रिश्तों की शुरुआत हमारे जन्म से ही हो जाती है और समय के साथ घर-परिवार, आस-पड़ोस, अपना समाज, स्कूल, कॉलेज, नौकरी, व्यवसाय  से होते हुए देश-विदेश तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से यह  दायरा व्यापक  होता जाता है. भारतीय संस्कृति में तो  'वसुधैव कुटुम्बकम्' यानी "पूरा संसार है मेरा परिवार" की बात कही जाती है. अच्छी बात है कि रिश्ते बनाने और निभाने में माहिर बहुत सारे लोग आपको हर क्षेत्र में मिल जायेंगे जो बिना किसी अपेक्षा के लोगों से जुड़ने का काम करते रहते हैं, क्यों कि वे मानते हैं कि रिश्तों का जीवन में सबसे अधिक महत्व है. इतना ही नहीं, रिश्ते बनाना और निभाना एक बड़ा लीडरशिप क्वालिटी माना जाता है. अलग-अलग बैकग्राउंड से आए विभिन्न लोगों की छोटी या बड़ी टीम को कप्तान  के रूप में एकजुट रखकर एक कॉमन गोल को हासिल करने का काम वाकई चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होता है. तभी तो  देश-विदेश के मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट में रिलेशनशिप मैनेजमेंट की पढ़ाई होती है; कॉरपोरेट सेक्टर के साथ-साथ सरकारी विभागों में भी कर्मियों को इस लाइफ स्किल के बहुआयामी पॉजिटिव रिजल्ट के बारे में बताया जाता है. देश-विदेश के कामयाब और सम्मानित लोगों के जीवनवृत पर नजर डालें तो आप पायेंगे कि वे लोगों से अच्छे संबंध कायम करने, निभाने और उसके माध्यम से बड़ी-से-बड़ी समस्या का समाधान निकालने में दक्ष रहे हैं. 
  
शांति और सौहार्द बनाए रखेंगे: अनेक भाषाओं, जातियों और धर्मों वाले हमारे विशाल लोकतान्त्रिक देश में "सब जन हिताय, सब जन सुखाय" के सनातन दर्शन को चरितार्थ करते रहने के लिए यह अनिवार्य है कि देश में शांति और सौहार्द का वातावरण बराबर कायम रहे. अच्छी बात है कि प्राचीन काल  से ही हमारे देश में अधिकतर लोग आपसी भाईचारे और मेलमिलाप की भावना से रहते आए हैं. मूलतः यह हमारे देश का संस्कार है. यह हमारी विशेष पहचान है. इसी के बलबूते हर भारतीय अपने उत्थान के लिए सपने देखता है और उन्हें साकार करने में जुटा रहता है. सब  जानते हैं कि अशांति और आपसी मनमुटाव विकास की गति को बाधित करते हैं. इससे व्यक्ति, समाज और देश सभी कमजोर होते हैं. हां, इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को उठाना पड़ता है. यह सौ फीसदी सच है कि देश में शांति और सौहार्द का माहौल बिगाड़ने में देश के मुट्ठीभर लोगों और चुनिन्दा अंतरराष्ट्रीय  संगठनों की भूमिका होती है. ऐसे निहित स्वार्थी तत्वों का मतलब भारत को अस्थिर एवं अशांत करके आर्थिक और सामरिक हानि  पहुंचाना और इसके माध्यम से अपना उल्लू सीधा करना होता है. ऐसे में सच्चे, अच्छे और समझदार लोगों खासकर युवाओं से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वे स्वयं शांति और सौहार्द बनाए रखें, दूसरों को इसके लिए सतत प्रेरित करें और अपने आसपास के उन स्वार्थी तत्वों को पहचानने और उन्हें दंडित करवाने  में प्रशासन की मदद करें. 

सच मानिए, ऐसे छोटे-छोटे संकल्प लेकर और उनपर दृढ़ता से अमल करके हम न केवल अपने जीवन को सही अर्थ में उन्नत कर पायेंगे, बल्कि देश को भी मजबूत, समृद्ध और खुशहाल बना पायेंगे. सही मायने में "नया साल मुबारक हो" कहने की सार्थकता भी इसी में है. 

(hellomilansinha@gmail.com)      

      
                और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं 
# दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 01 जनवरी , 2022 को प्रकाशित 

#For Motivational Articles in English, pl. visit my site : www.milanksinha.com