Tuesday, February 22, 2022

इतना मुश्किल भी नहीं खुश रहना

                            - मिलन  सिन्हा, मोटिवेशनल स्पीकर एंड वेलनेस  कंसलटेंट

यह सच है कि कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न विषम एवं अप्रत्याशित परिस्थिति के कारण खुशी का सूचकांक दुष्प्रभावित हुआ है.
लेकिन जीवन तो चलते रहने का नाम है और खुशी का सीधा सम्बन्ध हमारी अपनी सोच से जुड़ा है. काबिले गौर बात है कि एक समान परिस्थिति में अलग-अलग लोग भिन्न तरीके से सोचते हैं, रियेक्ट करते हैं और खुशी-नाखुशी आदि का इजहार भी करते हैं. यह भी शाश्वत सत्य है कि जीवन में खुशी सबको चाहिए और खुश रहना हमारी स्वभाविक प्रवृति भी है. कवि गुरु रबींद्रनाथ ठाकुर कहते हैं, "खुश रहना बहुत सिंपल है, लेकिन सिंपल रहना कठिन है." वाकई ऐसा ही अधिकतर  लोग व्यवहारिक स्तर पर फील भी कर रहे हैं. कारण तलाशना कठिन नहीं है. दरअसल, आजकल बड़ी संख्या में लोग आवश्यकता और विलासिता में फर्क नहीं कर पा रहे हैं. आमतौर पर हम सरलता को छोड़कर या भूलकर जाने-अनजाने जटिलता की ओर बढ़े जा रहे हैं. "संतोषम परम सुखम या साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय; मैं भी भूखा ना रहूं, साधु ना भूखा जाय" जैसे हमारे पारंपरिक भारतीय जीवन मूल्यों से आज हम "यह दिल मागे मोर" या "अपना सपना मनी-मनी" के तथाकथित आधुनिक सोच एवं जीवनशैली तक पहुंच गए हैं. ये हमारी लाइफस्टाइल हो गई है और हम सब कुछ फास्ट-फास्ट चाहते हैं. वह भी येनकेन प्रकारेण. चाहत असीमित हैं पर प्रयास और उपलब्धि उसकी तुलना में काफी कम. जीवन में संतुलन और सामंजस्य का अभाव स्पष्ट दिख रहा है. नतीजतन जीवन में तनाव बढ़ता जा तरह है और खुशी कम होती जा रही है. महात्मा गांधी कहते हैं कि खुशी  तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, वे सामंजस्य में हों. तो आइए "जहां चाह, वहां राह" वाले सिद्धांत को मानते हुए इन पांच बातों पर अमल करने का संकल्प लेते हैं, जिससे कि खुश रहना मुश्किल न हो.

  
गतिशीलता एवं संतुलन बनाए रखें:
प्रख्यात वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन की यह बात हमेशा याद रखें कि जीवन साइकिल की सवारी करने के समान है यानी सोच और कर्म के स्तर पर गतिशीलता एवं संतुलन बनाए रखें. कहने का सीधा अर्थ यह कि अतिरेक से बचते हुए आपको अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते जाना है. इसके लिए पॉजिटिव माइंडसेट एवं समुचित प्रयास की जरुरत होगी. दुःख की बात है कि हम सोचने और चिंता करने में बहुत समय व्यतीत करते हैं, जब कि करने के मामले में सक्रियता अहम होती है. अतः सोचने और करने में एक अच्छा संतुलन बनाए रखना है और सही समय पर सही काम करते जाना है.

  
खुद के कार्यों की निरपेक्ष समीक्षा जरुरी:
खुद के कामों की सतत समीक्षा जरुरी होती है,  क्यों कि खुद से बेहतर समीक्षक कोई नहीं हो सकता. आप दूसरों से झूठ बोल सकते हैं, लेकिन खुद से झूठ नहीं बोल सकते. निरपेक्ष समीक्षा कर अपनी कमियों को पहचानें और उन्हें निरंतर दूर करने का प्रयास करते रहें. इससे आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा, आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप वास्तविक रूप से खुश रह पायेंगे. याद रखें,  यदि  आपकी  खुशी इस  बात  पर  निर्भर  करती है कि कोई और क्या करता  या कहता है तो  यक़ीनन आपकी सोच में कोई-न-कोई समस्या है. अतः खुद पर फोकस कीजिए और बराबर अच्छाई से जुड़ते रहिए.


दूसरों के अच्छे काम की तारीफ करें:
  हमेशा दूसरों के अच्छे कामों की सच्ची तारीफ करें. तारीफ करने में कंजूसी बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए. यदि आप अपने परिजन, सहयोगी या मित्र के काम की तारीफ करते हैं, तो इससे उन्हें मोटिवेशन और पॉजिटिव एनर्जी मिलेगा. नतीजतन अगली  बार वे पहले से भी बेहतर करने का प्रयास करेंगे. लेकिन, यदि आप छोटी से कमी या गलती पर शिकायत या आलोचना करेंगे या सार्वजनिक रूप से डाटेंगे, तो उनका मनोबल गिरेगा. इसका असर उनकी कार्यक्षमता पर पड़ना निश्चित है. बेशक हम अलग से उनकी काउंसलिंग करेंगे. कहने का अभिप्राय यह कि हमें तो बस छोटी-बड़ी उपलब्धियों पर खुश होना सीखना चाहिए और घर-बाहर खुशी के मौके में दिल से शरीक होना चाहिए जिससे कि हम हैप्पीनेस साइकिल का अभिन्न हिस्सा बने रह सकें.


परिवारजनों और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं:
अमूमन व्यस्तता या अन्य किसी कारण से हम यह काम नहीं करते हैं. यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि सुख-दुःख हर हाल में ये लोग ही हमारे साथ खड़े रहते हैं. हम उन्हें समय नहीं देंगे तो उनसे समय की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं. दरअसल, किसी को भी सामान्यतः समय की कमी नहीं होती. सवाल सिर्फ समय प्रबंधन और प्राथमिकता का होता है. एक विचारणीय बात और. अगर परिवार के लोग और दोस्त भी हमारी प्राथमिकता में नहीं हैं और उनके लिए भी हमारे पास समय नहीं है तो हमारा खुश रहना मुश्किल होगा ही. हमने महसूस किया है कि उनके साथ दिनभर में एक घंटा भी हम बिता लेते हैं, बेशक रात को खाने के टेबल पर ही सही, तो मन प्रसन्न हो जाता है.  


वर्तमान को एंजॉय करने की आदत डालें:
पूर्व प्रधान मंत्री और विचारक-कवि अटल बिहारी वाजपेयी अपनी एक कविता में कहते हैं "कल-कल करते आज हाथ से निकले सारे, भूत-भविष्य की चिंता में वर्तमान की बाजी हारे." ज्यादातर लोगों के साथ यही होता है. अतीत में जो नहीं कर पाए, उसे लेकर अवसाद और पश्चाताप की स्थिति में रहते हैं या भविष्य की चिंता या अनिश्चितता को लेकर कन्फ्यूज्ड और परेशान, जब कि जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय वर्तमान होता है और उसी का भारी नुकसान होता रहता है. भारतीय ओलिंपिक महिला हॉकी टीम के सदस्यों  सहित कई अन्य खिलाड़ियों ने इस बात को रेखांकित किया कि उन्हें माइंडफुलनेस की ट्रेनिंग दी गई यानी भूत-भविष्य की बातों को भूलकर सिर्फ वर्तमान क्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया. सचमुच वर्तमान को एन्जॉय करने और बीते हुए कल से बेहतर प्रदर्शन की भरपूर कोशिश करने की आदत से हम स्वास्थ्य और सफलता के साथ-साथ खुशी को भी सुनिश्चित कर सकते हैं.  

 (hellomilansinha@gmail.com)

                  
             और भी बातें करेंगे, चलते-चलते. असीम शुभकामनाएं.              # "प्रभात खबर -सुरभि " में 16.01.22 को प्रकाशित   

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Tuesday, February 8, 2022

छह योग क्रियाओं से फेफड़ों को रखें स्वस्थ

                                            - मिलन  सिन्हा,  स्ट्रेस मैनेजमेंट एंड वेलनेस कंसलटेंट 

जाड़े के मौसम में हर साल देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के अनेक प्रदेशों में धुन्ध, कुहासा और कोहरा का प्रकोप जारी रहता है. इन इलाकों में प्रदूषण, खासकर वायु प्रदूषण के कारण स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है. लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है. श्वसन तंत्र में समस्या और खासकर फेफड़े में तकलीफ के कारण लोग ज्यादा परेशान रहते हैं. कोरोना महामारी के इस दौर में तो लंग्स को हेल्दी रखना और भी ज्यादा जरुरी है. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए खानपान में कुछ जानी-पहचानी चीजों को शामिल करने के साथ-साथ कुछ योग क्रियाओं का नियमित अभ्यास करना बहुत लाभदायक होता है. आइए जानते हैं उन योग क्रियाओं के बारे में. 

तीन आसन: 
1. हस्त उत्तानासन:  पंजों को मिलकर सीधा खड़ा हो जाएं और हाथों को पेट के सामने कैंचीनुमा आकार में रखें. अब हाथों को इसी स्थिति में ऊपर ले जाते हुए गर्दन को पीछे झुकाएं. तत्पश्चात बाहों को कंधों की सीध में दोनों ओर फैलाएं. अब हाथों को कैंचीनुमा बनाकर पहली अवस्था में आ जाएं. हाथों को ऊपर उठाते समय श्वास लें और  नीचे लाते हुए श्वास छोड़ें. हाथ उठी हुई स्थिति में श्वास को अंदर रोकें. इस क्रिया को कम-से-कम 5 बार दोहराएं.

2. पाद हस्तासन:  हाथों को बगल में रखकर सीधे खड़े हो जाएं. अब श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे झुकें और अंगुलियों को फर्श के जितना संभव हो उतना नजदीक ले जाएं. सिर को घुटनों से लगाने का प्रयास करें. धीरे-धीरे श्वास लेते हुए पूर्व स्थिति में लौटें. इसे कम-से-कम 5 से 10 बार करें. 

3. भुजंगासन: पांव को सीधा करके पेट के बल लेट जाएं. माथे को जमीन से सटने दें. हथेलियों को कंधे के नीचे जमीन पर रखें. अब श्वास लेते हुए धीरे-धीरे सिर तथा कंधे को हाथों के सहारे जमीन से ऊपर उठाइए. सिर और कंधे को जितना पीछे की ओर ले जा सकें, ले जाएं. ऐसा लगे कि सांप अपना फन उठाये हुए है. श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस प्रथम अवस्था में लौटें. इस क्रिया का अभ्यास  कम-से-कम 5 बार करें. 

इनके लाभ: इन आसनों के नियमित अभ्यास से श्वसन प्रणाली स्वस्थ रहता है.  इनके अभ्यास  से  शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ती है और रक्त संचार में सुधार होता है. ये सीने की मांसपेशियों को मजबूत करता है और फेफड़ों को हेल्दी रखता है.  

तीन  प्राणायाम: 
1. भस्त्रिका: सुखासन, अर्धपद्मासन या पद्मासन किसी भी आसन में आराम से बैठें. आँखें बंद कर लें और मेरुदंड सीधा रखें. गहरी सांस फेफड़े में भरें. जितना गहरा सांस लें, उतना ही  दबाव के साथ सांस बाहर निकलने दें. पूरक और रेचक समानान्तर चलने दें. सांस लेने-छोड़ने में करीबन बराबर समय लगे, इसका ध्यान रखें. 

2. कपालभाति: ध्यान के किसी भी आसन में आराम से सीधा बैठ जाएं. आँखें बंद कर लें और शरीर को ढीला छोड़ दें. रेचक यानी श्वास छोड़ने की प्रमुखता रखते हुए श्वसन क्रिया करें. पूरक यानि श्वास लेने की क्रिया सहज और सामान्य रखें. केवल रेचक क्रिया में थोड़ा जोर लगाएं. 

3. अनुलोम-विलोम: सुखासन, अर्धपद्मासन या पद्मासन में सीधा बैठ जाएं. शरीर को ढीला छोड़ दें. हाथों को घुटने पर रख लें. आँख बंद कर लें और श्वास को आते-जाते महसूस करें. अब दाहिने हाथ के प्रथम और द्वितीय अंगुलियों को ललाट के मध्य बिंदु पर रखें और तीसरी अंगुली (अनामिका) को नाक के बायीं छिद्र के पास और अंगूठे को दाहिने छिद्र के पास रखें. अब अंगूठे से दाहिने छिद्र को बंद कर बाएं छिद्र से दीर्घ श्वास लें और फिर अनामिका से बाएं छिद्र को बंद करते हुए दाहिने छिद्र से श्वास को छोड़ें. इसी भांति अब दाहिने छिद्र से श्वास लेकर बाएं से छोड़ें. यह एक आवृत्ति है.

इनके लाभ: शरीर में पहुंची अतिरिक्त ऑक्सीजन और कार्बन डाईऑक्साइड के निष्कासन से फेफड़ों का पोषण होता है. यह आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है, और उन्हें मजबूत करता है. कपालभाती को शरीर से विषाक्त पदार्थों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को निकालने के लिए जाना जाता है.

(इन योग क्रियाओं के अभ्यास में सावधानी यह बरतें कि इन क्रियाओं को जल्दबाजी या बलपूर्वक न करें. प्राणायाम के अभ्यास के दौरान  मन पूरक-रेचक पर केन्द्रित हो. अभ्यास का समय शुरुआत में अधिकतम 5 मिनट रखें. आगे  सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार इसमें धीरे-धीरे वृद्धि करें.)  

 (hellomilansinha@gmail.com)      

      
                और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं 
# "प्रभात खबर - हेल्दी लाइफ " में 29.12.2021 को प्रकाशित 

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