Tuesday, February 18, 2020

नई राहें: बनें कामयाबी के हकदार

                                            - मिलन  सिन्हा,  मोटिवेशनल स्पीकर, वेलनेस  कंसलटेंट ...
जीवन की लम्बी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आते हैं और सफलता-असफलता से हम रूबरू होते हैं. इसमें अस्वाभाविक कुछ भी नहीं. सच कहें तो अनुकूल एवं प्रतिकूल दोनों ही अवस्था में जब हम खुद से प्यार करते रहते हैं, तभी हम सफलता या असफलता का सही आकलन-विश्लेषण कर पाते हैं. और-तो-और इससे हमें आगे की कार्ययोजना को बेहतर बनाकर यथासाध्य कोशिश करते रहने की प्रेरणा भी मिलती है. प्रसिद्ध अमेरिकी गायिका, मॉडल और अभिनेत्री लूसली बॉल का स्पष्ट कहना है, "पहले खुद से प्यार करें. बाकी सबकुछ स्वतः ठीक होते जायेंगे. इस संसार में कुछ भी करने के लिए आपको वाकई खुद से प्यार करना होगा." दरअसल, जीवन में सक्सेस की संख्या को सहजता से बढ़ाते रहने के लिए खुद से प्यार करना तो अनिवार्य शर्त है ही, साथ ही सक्सेस यात्रा में मजबूती से आगे बढ़ते रहने के लिए कुछ और सरल व अहम सूत्र को जानना, समझना और ठीक से आत्मसात करके उस पर अमल करना भी जरुरी है.

पहला है खुद को अच्छी तरह से जानना - हमारे सपने, हमारी इच्छाएं, जीवन का मुख्य लक्ष्य, हमारे व्यक्तित्व की खूबियां और खामियां आदि. इन बातों पर निरपेक्ष भाव से अच्छी तरह गौर करना और उन्हें एक कागज़ पर लिखना अनिवार्य है. इससे हमें अच्छी तरह पता हो जाता है कि हमारे स्ट्रांग पॉइंट्स क्या हैं और हम किन मामलों में कमजोर हैं. खूबियों की संख्या ज्यादा होने पर न तो उससे अंहकार से ग्रस्त हों और न ही कमियां ज्यादा होने पर दुखी या अवसादग्रस्त. हर हाल  में खुद से प्यार करते रहें. हां, उस फैक्ट शीट के आधार पर अगर हम लगातार अपने मजबूत पक्ष को और मजबूत करते रहें और साथ में अपनी कमजोरियों को कम करते रहें, तो कुछ महीनों में ही हमें अपने व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव साफ़ दिखने लगेगा. स्वाभाविक रूप से हमारी कार्यक्षमता और उत्पादकता पर इसका जबरदस्त असर भी होगा.

रोज सुबह-सुबह अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए एक सरल मंत्र है. इसे आजमाकर जरुर देखें. सुबह सो कर उठने के बाद सबसे पहले कुछ देर आईने के सामने खड़े होकर खुद को निहारें. इसके बाद खुद से कई बार कहें 'आइ एम द बेस्ट'; मैं कर सकता हूं और मैं करूंगा.  ऐसा करने से शरीर में सकारात्मक तरंगों का संचार होगा. इससे न सिर्फ शरीर में स्फूर्ति महसूस होगी, बल्कि विचार भी बेहतर बनेंगे. दरअसल, मन को जैसा समझाएंगे, मानस वैसा बनेगा और व्यक्तित्व भी वैसा ही बनेगा. सभी जानते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार  नहीं होती. केवल क्षमता प्रबंधन के महत्व को समझते हुए परफॉरमेंस को बेहतर करते रहना है.

मार्टिन लूथर किंग जूनियर कहते हैं कि अच्छा कार्य करने के लिए हर समय अच्छा होता है. बीता हुआ वक्त कभी लौट कर नहीं आता. लिहाजा, हमारे शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म एजेंडा में जो भी कार्य शामिल किए गए हैं, उन्हें निर्धारित समय पर शुरू और संपन्न करना जरुरी है. हां, जिस समय जो काम करें पूरे मनोयोग से करें और उसे एन्जॉय करें. चाणक्य का कहना है, "जब भी किसी काम को आरम्भ करें, असफलता से मत डरें और उस काम को बीच में नहीं छोड़ें. जो लोग इमानदारी से काम करते हैं वो ज्यादा खुश रहते हैं." रोचक तथ्य है कि  दुनिया के हर व्यक्ति को 24 घंटे का ही समय मिला है, न एक मिनट ज्यादा और न ही एक मिनट कम. कामयाब लोग इसको बहुत अच्छी तरह समझते है और समय का बेहतर उपयोग करके सफलता के नए-नए मुकाम हासिल करते हैं.

घर हो या बाहर हमें आए दिन किसी-न-किसी समस्या का सामना करना पड़ता है. वर्क प्लेस में तो अमूमन ऐसी स्थिति दिन में कई बार आती है. कभी समस्या  छोटी होती है तो कई बार बड़ी और बहुत गंभीर. हर जगह चुनौती और अपेक्षा यह होती है कि समस्या  से कैसे सफलतापूर्वक निबटा जाय और अंततः समाधान तक पहुंचा जाय. कई सर्वे में यह पाया गया है कि कई लोग किसी भी नए ओपरचुनिटी में कोई-न-कोई प्रॉब्लम देख लेते हैं. इतना ही नहीं वे जाने-अनजाने समस्या को बड़ा बना कर प्रस्तुत करते हैं. इससे कार्यस्थल का वातावरण नेगेटिव बनता है. इसके विपरीत, बस कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर समस्या में कुछ बेहतर करने का एक नया अवसर देखते हैं. कहने की जरुरत नहीं कि हर नियोक्ता या उच्च अधिकारी बस यही तो चाहते  हैं कि उनके कर्मी ऐसे खुले दिमागवाले हों जो हर चुनौती या समस्या को सलूशन फाइंडर की दृष्टि से देखें और सामने आए समस्या को शुरू से ही सुलझाने का हर संभव प्रयास करें. गौरतलब बात है कि ऐसे पॉजिटिव थॉट वाले कर्मी हर ऐसे सहकर्मी से मदद लेने का प्रयास भी करते हैं  जो उस मामले को सुलझाने में उससे बेहतर क्षमता एवं दक्षता रखते हैं. जाहिर है कि तमाम समस्याओं के बावजूद ऐसे लोग ही संस्था को समाधान तक पहुंचाने में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाते हैं. किसी  सफलता का श्रेय लेना उसका ध्येय नहीं होता. वे तो केवल आस्था व निष्ठा पूर्वक अपनी ड्यूटी करते हैं.  निःसंदेह, ऐसी प्रकृति के लोग हर जगह सक्सेस और सम्मान के हकदार भी बनते हैं. 
(hellomilansinha@gmail.com)

                 
                और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं 
# दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में प्रकाशित
#For Motivational Articles in English, pl. visit my site : www.milanksinha.com

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