Sunday, April 5, 2015

गुड लाइफ : रिश्तों की पूंजी

                               -   मिलन सिन्हा
आमतौर पर देखा गया है कि अधिकांश लोग दिन-रात पैसे कमाने और जोड़ने में अपना ज्यादा ध्यान लगाये रहते हैंइस काम को अंजाम देने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करतेकई बार तो गलत-सही का ख्याल भी नहीं रहताबेशकपैसा जीवन में अहम रोल अदा करता हैलेकिन सिर्फ पैसे के पीछे भागने वाले लोग जीवन की अन्य मौलिक आवश्यकताओं को भूल जाने की गंभीर गलती करते हैं जिसका मलाल उन्हें बाद में वर्षों तक सालता रहता हैइनमें संबंधों के मायनों को न समझना और उसे अपेक्षित महत्व न देना शामिल है ,जब कि हम अच्छी तरह जानते हैं कि सम्बन्ध बनाना और निभाना सुख और समृधि दोनों के लिए अनिवार्य हैएक अरसे से ‘रिलेशनशिप बियॉन्ड बैंकिंगरिलेशनशिप देट काउंट्सओनली रिलेशनशिप मैटर्ससरीखे कॉरपोरेट विज्ञापन हमारा ध्यान आकर्षित करते रहे हैंजो रिश्तों की महत्ता को बखूबी रेखांकित करते हैंविचारणीय प्रश्न है कि पैसे तो जैसे-तैसे भी बनाए जा सकते हैंलेकिन अच्छे रिश्ते ऐसेवैसे या जैसे-तैसे नहीं बनाये जा सकतेइसके लिए सतत ईमानदारी तथा आपसी समझ-बूझ अनिवार्य हैसभी जानते हैं कि संबंधों में आई खटास को मिठास में बदलना कितना मुश्किल होता है.


सच कहें तो जन्म से ही हमारे संबंधों का दायरा बढ़ना शुरू हो जाता हैआगे यह सिलसिला घर-परिवार से निकल कर बन्धु-बान्धवपड़ोसी-सहकर्मी आदि से लेकर देश-दुनिया तक फैलने की संभावनाओं से भरा होता हैयही कारण है कि सभी प्रबंधन संस्थाओं में रिलेशनशिप बिल्डिंग/पब्लिक रिलेशन  यानी रिश्ते निर्माण/जन-संपर्क को पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता हैनेतृत्व क्षमता के समुचित विकास में इसका अतिशय महत्व होता हैतभी तो तमाम ज्ञानकौशल आदि गुणों से लैस होने के बावजूद रिश्ते बनाने व निभाने में कम निपुण व्यक्ति को किसी भी टीम में कैप्टन की जिम्मेदारी नहीं दी जाती है
          और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

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