Monday, December 5, 2016

यात्रा के रंग : अब पुरी की ओर -2

                                                                                              - मिलन सिन्हा 
सुबह नींद खुली तो ट्रेन एक छोटे से स्टेशन पर खड़ी थी. नाम था – साक्षी गोपाल.  वहाँ से पुरी की दूरी करीब 20 किलोमीटर थी. यह स्थान एक धार्मिक प्रसंग से जुड़ा है, ऐसा लोग कहते हैं. कथा कुछ ऐसी है : एक बार श्री कृष्ण अर्थात गोपाल दो ब्राह्मणों के बीच एक विवाद के निबटारे के सिलसिले में गवाह यानी साक्षी के रूप में यहाँ आये थे और इस स्थान की प्राकृतिक सुन्दरता से प्रभावित होकर कुछ दिनों तक रुके थे. कहने का तात्पर्य यह कि साक्षी देने के लिए गोपाल यहाँ आये थे, लिहाजा यह स्थान 'साक्षी गोपाल' के नाम से जाना जाता है. 


खैर, स्टेशन पर चाय, समोसा, चनाचूर आदि के स्थान पर सुबह-सुबह 'डाब अर्थात नारियल पानी ' बेचते कई लोग दिखे, वह भी बिलकुल ताजा और सस्ता . बहुत अच्छा लगा. शायद आप जानना चाहें, आखिर क्यों? तो बताते चलें कि स्वास्थ्य की दृष्टि से डाब एक बेहतर प्राकृतिक पेय है. इसमें काफी  मात्रा  में विटामिन - सी, मैग्नीशियम, पौटेशियम और दूसरे महत्वपूर्ण खनिज होते हैं. माना जाता है कि सुबह-सुबह नारियल पानी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है. यह हमारे पाचन तंत्र को ठीक रखने,  रक्त चाप को नियंत्रित करने और सिरदर्द एवं माइग्रेन को कम  करने के साथ –साथ  हमारी अन्य कई शारीरिक समस्याओं में लाभकारी  सिद्ध  होता है. इसमें अपेक्षाकृत कम शूगर एवं फैट होने के कारण इसे  एक उपयुक्त  एनर्जी और स्पोर्ट्स ड्रिंक भी  माना जाता है.

ट्रेन आगे बढ़ी तो रेलवे लाइन के दोनों ओर दूर तक नारियल के पेड़ दिखते रहे, पूरे फलदार. सागर तट निकट आने का एहसास भी होता गया. ट्रेन नियत समय के आसपास ही पुरी के तीन नंबर प्लेटफॉर्म पर आ कर रुक गई. कई प्लेटफार्मों वाला पुरी रेलवे स्टेशन साफ़-सुथरा था.  इस दिशा का अंतिम स्टेशन होने के कारण डिब्बे खाली होने लगे और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का बहिर्गमन. आबोहवा में आद्रता की अनुभूति होने लगी. ट्रेन में हमारा डिब्बा पीछे होने के कारण निकास द्वार तक काफी चलना पड़ा, अपना-अपना ट्राली सूटकेस लेकर. ट्रेन के सहयात्रियों के साथ-साथ कुछ दूर तक ही सही, चलना अच्छा लगा.  जाति, धर्म, भाषा, जिला-प्रदेश, गरीब-अमीर आदि भावनाओं से इतर सिर्फ मानवता का भाव लिए सभी इस यात्रा के अंत में अपने गंतव्य की ओर अग्रसर थे.
                       (hellomilansinha@gmail.com)

               और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं 

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