Sunday, July 19, 2015

गुड लाइफ: जानकार एवं जागरूक बनें

                                                                                            - मिलन सिन्हा
clip2011 के जनगणना के मुताबिक देश में साक्षर लोगों की संख्या में 9.2 % की वृद्धि दर्ज की गई. वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार यह आंकड़ा कुल जनसंख्या का  64.84 % था तो 2011  में बढ़कर 74.04 % हो गया . निश्चय ही यह देश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रही प्रगति का सूचक है. लोग निरंतर साक्षर  व  शिक्षित बनें, यह लोकतान्त्रिक ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए अनिवार्य  माना जाता है. लेकिन क्या साक्षर, शिक्षित या प्रशिक्षित  होने मात्र से हम स्वतः ही जानकार एवं जागरूक भी माने जायेंगे  या सही मायने में जानकार  तथा जागरूक होना इसके आगे की बड़ी और ज्यादा महत्वपूर्ण सीढ़ी है जिसके माध्यम से हम अच्छे–बुरे की समझदारी से लैस होकर अपने और अपने परिवार –समाज की बेहतरी के लिए काम करते हैं . मसलन,  सिगरेट, गुटखा, खैनी , शराब आदि हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं , तथापि हममें से अनेक, पढ़े –लिखे होने के बावजूद  इनका सेवन करते रहते हैं क्योंकि हम  इनसे होने वाले दुष्परिणामों के प्रति पूर्णतः जागरूक नहीं हैं . देश में जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर, ह्रदय रोग, गुर्दे की बीमारी आदि से बहुत हद तक बचे रहने के एकाधिक उपाय हैं जो जीवनशैली में अपेक्षित सुधार या बदलाव से संभव हो सकता है और अगर किसी कारण हम ऐसी बीमारी के शिकार हो भी जाते हैं , तब भी ऐसे रोगों के इलाज की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुलभ है, बेशक सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में खर्च में भारी अंतर है, लेकिन पर्याप्त जागरूकता के अभाव में हम इन सुविधाओं का भरपूर फायदा उठाने से वंचित रह जाते हैं . एम्स, दिल्ली के कैंसर रोग विशेषज्ञ  डॉ. रथ ने हाल ही में एक टीवी प्रोग्राम में इस बात को बखूबी रेखांकित किया . उन्होंने कहा कि कैंसर के ‘स्टेज –वन’ यानी प्रारंभिक अवस्था वाले मरीज के समुचित इलाज के उपरान्त पूर्णतः ठीक होने की संभावना 80 %  होती है. जब कि ‘स्टेज –टू’  यानी इलाज में देरी से  रोग के पुराने व गंभीर अवस्था में पहुंचने के कारण सुमिचित इलाज के बाद भी रोगी के अच्छे होने की संभावना केवल 20 % रह जाती है. कमोबेश ऐसे ही परिणाम अन्य गंभीर रोगों के मामले में भी सामने आते हैं. अतः आवश्यकता इस बात की है कि जीवन की इस खट्टी–मीठी लम्बी यात्रा में हम हर मामले में जानकार एवं जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित एवं प्रेरित करते रहें.

                  और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

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