Tuesday, March 12, 2019

मोटिवेशन : सफलता के लिए नियमितता जरुरी

                                                                       - मिलन सिन्हा, मोटिवेशनल स्पीकर, ... ...
कहते हैं कि जोश के साथ होश भी हो और अच्छे काम की अच्छी शुरुआत के साथ उसकी गतिशीलता बनी रहे तो परिणाम बेहतर होने की संभावना से कोई इनकार नहीं कर सकता. परीक्षा से पहले अमूमन सभी विद्यार्थी के पढ़ने की अवधि और नियमितता में सुधार दिखाई पड़ता है. इसका लाभ परीक्षाफल में भी दिखाई पड़ता है. लेकिन परीक्षा ख़त्म होने के बाद ( एक-दो दिन के रिलैक्सेशन को छोड़ दें तब भी ) अधिकांश विद्यार्थी क्या करते  हैं? क्या वे उतने ही घंटे की पढ़ाई नियमित रूप से जारी रखते हैं? यह एक विचारणीय विषय है. 

सभी विद्यार्थी के जीवन में एक परीक्षा ख़त्म होती है तो देर-सबेर आगे दूसरी कोई परीक्षा इन्तजार करती है. हर दिन एक नया दिन होता है. उस दिन को सार्थक तरीके से जीना हर मायने में अच्छा होता है. जो लोग कुछ करते रहते हैं और नियमित रूप से करते रहते हैं, बेशक सकारात्मक सोच और तरीके से, उनकी प्रगति  यात्रा बदस्तूर जारी रहती है. इस मामले में प्रकृति के मूल चरित्र पर थोड़ा गौर करें तो आसानी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है.     

सामान्यतः यह पाया गया है कि स्कूल-कॉलेज की सालाना परीक्षा समाप्त होने के बाद  विद्यार्थी अपनी किताबों को उठाकर रख देते हैं, जैसे कि अब उन किताबों से कोई सरोकार ही नहीं. जब कि परीक्षा के दौरान और उससे पहले भी बहुत कम विद्यार्थी ही कोर्स के सभी विषयों के सभी चैप्टर को ठीक से समझ कर पढ़ पाते हैं. ऐसे में अगर परीक्षा के बाद उपलब्ध समय को उस अधूरे ज्ञान को पूर्ण करने में लगा दें तो शायद रिजल्ट आने से पहले ज्ञान के मामले में आप बहुत बेहतर स्थिति में रहेंगे, अलबत्ता आपका रिजल्ट कैसा भी हो.  सभी जानते हैं कि सही ज्ञान से ही सही सम्मान मिलता है, आत्मविश्वास में यथोचित उछाल आता है, सो अलग. एक बात और. इस दौरान अगर कुछ समय अगले क्लास या जिस प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने की योजना है, उससे संबंधित सिलेबस का अवलोकन कर सकें, कुछ पढ़-समझ सकें तो उसका फायदा आपको ही मिलेगा और समय का सदुपयोग भी होगा. ऐसे भी कहा गया है कि खाली दिमाग शैतान का घर और सकारात्मक व गतिशील दिमाग प्रगति का द्योतक.  

इस विषय का एक और पहलू भी है. उदाहरण के तौर पर दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षा को ही लें तो इसमें  विद्यार्थी एक निर्धारित पाठ्यक्रम पर आधारित सवालों का उत्तर देते हैं. अर्थात अधिक-से-अधिक उन्हें उनके सिलेबस में शामिल विषयों का अध्ययन करना पड़ता है. हर बढ़ते क्लास के लिए पाठ्यक्रम थोड़ा भिन्न और उच्च स्तर का होता जाता है और विद्यार्थी उसी अनुरूप खुद को तैयार कर नयी चुनौती का सामना करते हैं. आगे इंजीनियरिंग, मेडिकल या अन्य प्रतियोगिता परीक्षा में पाठ्यक्रम का यह दायरा विस्तारित हो जाता है. यहां सिर्फ उत्तीर्ण होने या अच्छा ग्रेड हासिल करने की बात नहीं होती, बल्कि इतना बेहतर करने की कठिन चुनौती होती है जिससे कि अंततः लाखों प्रतियोगियों में से चुनिन्दा सफल लोगों की सूची में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकें. ऐसे में, तैयारी का दायरा बढ़ जाता है और उसकी शैली भी. इसलिए पढ़ने और सीखने के क्रम को जारी रखना बहुत जरुरी होता है. यानी आगे की परीक्षा में बेहतर करने के लिए नियमितता अनिवार्य है - पढ़ने और सीखने के मामले में. 

यहां इस बात को रेखांकित करना भी प्रासंगिक होगा कि कई विद्यार्थी कई बार किसी अच्छे कार्य को  पूरे उत्साह और उल्लास  के साथ शुरू तो करते हैं, लेकिन उन्हें नियमित व योजनानुसार आगे बढ़ाने से चूकते रहते है. सो, उस  कार्य की रफ्तार धीमी हो जाती है और अंततः वह कार्य रुक जाता है या अर्थहीन हो जाता है. परिणामस्वरूप,  एक तो वे  उस अच्छे कार्य को तार्किक परिणिति तक नहीं पहुंचा पाते और उसके फल का उपभोग नहीं कर पाते, बावजूद इसके कि उन्होंने  अपनी ऊर्जा और समय उस कार्य में लगाया है, दूसरे अगला कोई नया काम शुरू करने में उनको डर और शंका शुरू से ही घेरने लगती है.  

जानकार कहते हैं कि अगर किसी भी कार्य को समुचित ढंग से प्रारंभ करके आप अपनी दिनचर्या तथा दैनिक कार्य योजना में शामिल कर लेते हैं और उसे अगले साठ से नब्बे दिनों तक नियमित रूप से जारी रखते हैं तो आगे वह स्वतः चलता रहता है और एक समयावधि के बाद उसके अच्छे फल का आप  भरपूर आनंद उठाते हैं. अपने आसपास देखने पर भी आपको कई ऐसे साथी-सहपाठी मिल जायेंगे जो नियम और निष्ठापूर्वक इस सिद्धांत को अमल में लाकर सफलता और आनंद के हकदार बनते रहे हैं. 
                                                                                   (hellomilansinha@gmail.com)
                   और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं
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