Sunday, January 4, 2015

गुड लाइफ : नमक कम, स्वस्थ रहेगा शरीर

                                                  - मिलन  सिन्हा  
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 राजा की छोटी बेटी द्वारा अपने पिता को नमक जैसा महत्वपूर्ण बताने वाली कहानी हममें से अनेक लोगों ने पढ़ी होगी ।  नमक हराम, नमक हलाल  जैसे जुमले तो हम सब बचपन से सुनते आये हैं ।  अमिताभ बच्चन अभिनीत 'नमक हराम और  'नमक हलाल' फ़िल्में भी देखी हैं । नमक का हक़ अदा करने की बात जोर -शोर से की जाती है; नमक के एकाधिक  विज्ञापनों में कई नामचीन लोगों को देश का नमक खाने और उसका हक़ अदा करने का वादा करते भी देखा -सुना है । सच है, खाने में नमक न हो तो भोजन बेस्वाद लगता है । तभी तो  नमक को सबरस कहा जाता है, सभी रसों के केन्द्र में रखा जाता है । कहने का अभिप्राय यह कि नमक हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । इसे  रसायन शास्त्र में  सोडियम क्लोराइड के नाम से जाना जाता है । सच पूछिए  तो सोडियम क्लोराइड में 40 प्रतिशत सोडियम होता है और 60 प्रतिशत क्लोरीन । हम सब जानते हैं कि नमक का व्यापक प्रयोग खाने की चीजों में परिरक्षक (प्रिज़र्वेटीव ) के रूप में किया जाता रहा है । मक्खन, आचार आदि इसके सामान्य उदहारण हैं । डब्बाबंद एवं पैकेट में मिलनेवाली नमकीन चीजों में नमक की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होने का यह भी एक कारण है । काबिलेगौर बात है कि यही नमक रोगों को बढ़ानेवाला साबित हो रहा है, क्यों कि आजकल हमलोग नमक और नमकवाली चीजें कुछ अधिक ही खा रहे  हैं ।  हम अपने मुख्य भोजन में दाल, साग-सब्जी, मांस-मछली-अंडा, आचार, पापड़ आदि का खूब सेवन करते हैं, जिसमें नमक का जमकर प्रयोग होता है । नतीजतन, हमारे शरीर में नमक की मात्रा  यानी सोडियम की मात्रा मानक स्तर से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है और इससे हमलोग अनायास ही ह्रदय रोग, हाइपरटेंशन, दमा, ओेस्टोपोरोसिस, किडनी स्टोन जैसी कई  घातक बीमारी की चपेट में आ जाते हैं । पाया गया है कि एक औसत भारतीय वयस्क के दैनिक आहार में 8 ग्राम नमक होता है अर्थात करीब 3 ग्राम सोडियम जब कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए 3-4 ग्राम नमक काफी है ।

                   और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं 

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